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Wednesday, October 13, 2010

कला आलोचना में व्यापक संभावनाएं : मनीष



भोपाल 13 अक्टूबर।
रजा फेलोशिप से सम्मानित अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चित्रकार मनीष पुष्कले का कहना है कि भारत में कला एवं सांस्कृतिक समीक्षा का स्तर दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले काफी पिछड़ा हुआ है। भारत में आलोचना केवल रिपोर्ताज तक ही सीमित है, इस कारण भारत में अच्छे आलोचकों एवं समीक्षकों की कमी है। श्री पुष्कले बुधवार को माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंपर्क विभाग द्वारा ’व्यावसायिक संचार का सौंदर्यशास्त्र’ विषय पर एक सेमीनार को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे कला आलोचना के प्रति अपनी समझ विकसित करें और इस क्षेत्र में आगे आएं, क्योंकि इस क्षेत्र में असीम सम्भावनाएं हैं। पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे मनीष पिछले बीस सालों से कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं अपने छात्र जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता विश्वविद्यालय के परिसर ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है। मनीष पुष्कले के चित्रों की 500 से ज्यादा प्रदर्शनियां लग चुकी हैं। भारत के अलावा 55 अन्य देशों में भी उनके चित्रों की प्रदर्शनी हो चुकी है। मनीष ने पढ़ाई के दौरान विश्वविद्यालय में बिताए गए समय के अनुभवों को छात्रों के साथ बांटा, उन्होंने कहा कि इसके चलते वह भाषा के प्रति अपनी एक नई नजर और बेहतर समझ विकसित कर पाए, जिससे उनकी भाषा को मजबूती मिली। उन्होंने कहा कि भाषा का चित्रों की अभिव्यक्ति में काफी अहम योगदान रहता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह भाषा का सिर्फ एक योग्यता तक सीमित न रखें, बल्कि वह भाषा के प्रति श्रद्धा भी रखें। मनीष का कहना था कि हमारी देश में भाषा का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है, हमारे देश ने चार धर्म दिए हैं, कई महाकाव्य दिए हैं। उन्होंने भाषा में नई सम्भावनाओं को तलाशने पर जोर दिया। साहित्य को उन्होंने वैचारिक शक्ति व भाषाई समझ विकसित करने वाला माध्यम बताया। छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि वे जीवन की आपाधापी में अपने सपनों को देखना बन्द न करें बल्कि उसको जीने की कोशिश करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कमल दीक्षित ने कहा कि अपने छात्रों को ऊंचाईयाँ छूते देख उन्हें काफी खुशी होती है। इस दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षक व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी एवं आभार जनसंपर्क विभाग के अध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।

Friday, April 9, 2010

भारत के सामने दोहरी सुरक्षा चुनौतियां : एस.के.सिन्हा

भोपाल। भारत के सामने आज रक्षा के क्षेत्र में आंतरिक और बाहरी दोनो तरह की चुनौतियां है। देश की सुरक्षा को बाहरी चुनौतियां चीन और पाकिस्तान से है, जबकि आंतरिक चुनौतियां जेहादी और अलगाववादी हिंसा से है” माखनलाल चतुर्वेदी के जन्म दिवस पर आयोजित स्मृति व्याख्यान में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सिन्हा ने ये विचार व्यक्त किए।“राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां ” विषय पर विचार प्रकट करने के लिए सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सिन्हा, मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री राघवजी, मध्य प्रदेश सूचना आयुक्त व सचिव जनसंपर्क के मनोज श्रीवास्तव और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ब्रजकिशोर कुठियाला इस अवसर पर खासतौर से उपस्थित थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राघवजी ने कहा कि आज हर व्यक्ति चिंतित और आंदोलित है। ये देश का दुर्भाग्य है कि जो भौगोलिक अंश देश का अंग हुआ करते थे आज वो मोर्चा ताने खड़े हैं। भारत आज चुनौतियों से घिरा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में जनजागृति लानी होगी और इस काम में मीड़िया को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
विशिष्ट अतिथि मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के सभी पहलुओं को समझने की आवश्यकता है। भारत खुले समाज वाला देश है इसलिए हमें आंतरिक सुरक्षा के सभी मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पी.पी.तिवारी ने कहा कि देश के सामने बाहरी और आंतरिक दोनों चुनौतियां हैं पर उन चुनौतियों से निपटने की क्षमता हम में है। इतिहास में कितने संकट आए, पर हम थे, हम हैं और हम रहेंगे।असम और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रह चुके सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सिन्हा ने कहा कि हिंसक आंदोलन से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। चीन ने सिक्किम के प्रति अपना रवैया नरम किया है लेकिन अरुणाचल प्रदेश पर आज भी चीन अपना हक जताता है यह चिंता का विषय है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों एवं वरिष्ठ पत्रकारों के अनुभवों पर आधारित पुस्तक ‘दो दशक एक सफर एक पड़ाव” का विमोचन लेफ्टिनेंट जनरल श्री सिन्हा ने किया। पुस्तक का संपादन संस्थान के पूर्व छात्र व पत्रकार विजय मोहन तिवारी ने किया है। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय की कुलाधिसचिव जे.आर.झणाणे ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचलान विश्वविद्यालय की व्याख्याता राखी तिवारी ने किया।
( अन्नी अंकिता की रिपोर्ट)