Friday, August 24, 2012

सार्थक शनिवार- 25 अगस्त,2012


जनसंचार विभाग
 सार्थक शनिवार- 25 अगस्त,2012
व्याख्यान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम 11 बजे
स्थानः पंचम तल स्थित सभागार
ड्रेस कोडः सफेद (WHITE)
विषयः ईद और राष्ट्रीय सद् भावना
मुख्यवक्ताः श्री आरिफ बेग
(पूर्व केंद्रीय मंत्रीः भारत सरकार)
अध्यक्षताः  प्रो. बृजकिशोर कुठियाला
   (माननीय कुलपति महोदय)

सहभागिता से ही सार्थक होगा जनतंत्रः कुठियाला





भोपाल,24अगस्त। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृजकिशोर कुठियाला का कहना है कि हमारी संसदीय संस्थाओं को अपनी शुचिता, पवित्रता और महत्व बनाए रखना है तो आम लोगों को भी इन सवालों पर सोचना होगा। क्योंकि कोई भी जनतंत्र लोगों की सहभागिता और संवाद से ही सार्थक होता है।  वे यहां विवि परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
   इस अवसर पर कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ द्वारा आयोजित युवा संसद में लगातार तीसरी बार पहला स्थान पाकर आए विश्वविद्यालय के छात्रों का सम्मान भी किया गया। कुलपति ने उन्हें लगातार तीसरी बार पहला स्थान पाने पर बधाई दी और विद्यापीठ के कार्यों की सराहना की। उनका कहना था वर्तमान स्थितियां संतोषजनक नहीं हैं। संसद और विधानसभाओं में बहस का स्तर कम हो रहा है और जनांकांक्षाओं की अभिव्यक्ति उस रूप में नहीं हो पा रही है जो होनी चाहिए। उन्होंने कहा आज के युवा और मीडिया दोनों मिलकर इस परिदृश्य को बदल सकते हैं।पं. जवाहर लाल नेहरू, डा. लोहिया, मधु लिमये, सुरेंद्र मोहन, चंद्रशेखर, अटलविहारी बाजपेयी, सोमनाथ चटर्जी जैसे सांसदों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन तमाम नेताओं के योगदान से सीख लेकर हमें अपनी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डा. श्रीकांत सिंह, पुष्पेंद्रपाल सिंह, डा. पवित्र श्रीवास्तव, डा. मोनिका वर्मा सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

Tuesday, August 21, 2012

खतरनाक है समाज का बाजार में बदलनाः कमल कुमार







भोपाल,18 अगस्त। प्रख्यात उपन्यासकार एवं कथाकार कमल कुमार का कहना है कि स्त्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह कि वह समाज से बाजार बन रहे समय में किस तरह से प्रस्तुत हो। वे यहां माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मीडिया और महिलाएं विषय पर व्याख्यान दे रही थीं। उन्होंने कहा कि आर्थिक उदारीकरण की लहर ने उपभोक्तावादी संस्कृति को बढ़ावा दिया है। मीडिया भी इसमें प्रतिरोध करने के बजाए सहयोगी की भूमिका में खड़ा है। ऐसे में रिश्तों का भी बाजारीकरण हो जाना खतरनाक है। बाजार ने महिलाओं को सही मायने में उत्पाद में बदल दिया है, मीडिया की नजर भी कुछ ऐसी ही है।
    उनका कहना था कि उच्च लालसाओं और इच्छाओं ने समाज के ताने-बाने को हिलाकर रख दिया है। हमारे परंपरागत मूल्य ऐसे में सकुचाए हुए से लगते हैं। उनका कहना था कि स्त्री अगर उत्पाद बनती है तो उसे डिस्पोज भी होना होगा। यह एक बड़ा खतरा है जो स्त्रियों के लिए बड़े संकट रच रहा है। उन्होंने कहा कि युवतियों की नई पीढ़ी में ज्यादा खुलापन और आत्मविश्वास है, किंतु महिलाएं इसके साथ आत्ममंथन और संयम का भी पाठ पढ़ें तो तस्वीर बदल सकती है।   
    कमल कुमार ने कहा कि हमारे समाज में स्त्रियों के प्रति धारणा निरंतर बदल रही है। वह नए-नए सोपानों का स्पर्श कर रही है। माता-पिता की सोच भी बदल रही है ,वे अपनी बच्चियों के बेहतर विकास के लिए तमाम जतन कर रहे हैं। स्त्री सही मायने में इस दौर में ज्यादा शक्तिशाली होकर उभरी है। किंतु बाजार हर जगह शिकार तलाश ही लेता है। वह औरत की शक्ति का बाजारीकरण करना चाहता है। हमें देखना होगा कि भारतीय स्त्री पर मुग्ध बाजार उसकी शक्ति तो बने किंतु उसका शोषण न कर सके। आज के मीडियामय और विज्ञापनी बाजार में औरत के लिए हर कदम पर खतरे हैं। पल-पल पर उसके लिए बाजार सजे हैं।  कार्यक्रम का संचालन डा. राखी तिवारी ने किया तथा आभार प्रदर्शन विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया। आयोजन में डा. संजीव गुप्ता, अजीत कुमार, जगमोहन राठौर सहित जनसंचार विभाग के विद्यार्थी मौजूद रहे।

Thursday, August 16, 2012

सार्थक शनिवार -18 अगस्त,2012 का विस्तृत कार्यक्रम


 सार्थक शनिवार- 18 अगस्त,2012
क्विजः 12 बजे से 1 बजे
विषयः ओलंपिक और भारत
  क्विज मास्टरः आदित्य उत्तम (एमएएमसी-3) एवं निशांत (एमएएमसी-1)
सांस्कृतिक कार्यक्रमः 1 बजे से 2.30 बजे दोपहर
थीमः राष्ट्रभक्ति
ड्रेस कोडः सफेद (White)
संचालकः  मयूरेश विश्वकर्मा (एमएएमसी-3) एवं मनीष कुमार दुबे (बीएएमसी-3)
लंच ब्रेकः 2.30 से 3.30 बजे दोपहर
व्याख्यानः 3.30 बजे से 4.30 बजे सायं
विषयः मीडिया और महिलाएं
वक्ताः डा.कमल कुमार
(देश की प्रख्यात लेखिका एवं उपन्यासकार, नई दिल्ली)

सार्थक शनिवार में होगा कमल कुमार का व्याख्यान

 इस बार सार्थक शनिवार (18 अगस्त,2012) में प्रख्यात लेखिका कमल कुमार का व्याख्यान होगा। उनका परिचय आप सबके लिए प्रेरणा का विषय बन सकता है।

नाम: कमल कुमार
जन्म स्थान: अम्बाला (अविभाजित पंजाब, अब हरियाणा)
शिक्षा: बी. ए. (अर्थशास्त्र ऑनर्स), एम. ए. (हिंदी), पंजाब विश्वविद्यालय. विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान और स्वर्ण पदक प्राप्त. एम. फिल, पी-एच. डी. (दिल्ली विश्वविद्यालय)
- एम. फिल साठ के बाद की कविता पर और पी. एच. डी. अग्येय की कविता पर
अनुभव: आवासीय लेखक, प्रोफ़ेसर - महात्मा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय विशविद्यालय (वर्धा); रिसर्च एसोसिएट - मुम्बई उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला; विजिटिंग प्रोफ़ेसर - मुम्बई, पुणे, अहमदाबाद, इलाहाबाद विश्वविद्यालयों में तथा कैथोलिक यूनिवर्सिटी, बेल्ज़ियम में.
- अन्तर्विषयी अध्ययन - साहित्य, स्त्री विमर्श और मीडिया.
संप्रति: दिल्ली विश्वविद्यालय के जीज़स एण्ड मेरी कॉलेज में असोसिएट प्रोफ़ेसर और दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर में गेस्ट फ़ैकल्टी के साथ
प्रकाशित रचनायें: सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विषयों पर सौ से भी अधिक लेख विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित - नवभारत टाइम्स, दैनिक हिन्दुस्तान, जनसत्ता, साहित्य अमृत, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, इंडिया टुडे, समकालीन साहित्य, ज्ञानोदय, वागर्थ, अक्षरा, साक्षात्कार, वसुधा, दस्तावेज, नई धारा, मनस्वी संबोधन, पुनश्चय, हंस, कथादेश, कथाक्रम, सद्भावना दर्पण इत्यादि में प्रकाशित.
कविता संग्रह: 1. बयान, सन्मार्ग पब्लिशिंग हाऊस, 1981
2. गवाह, नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, 1990
3. साक्षी हैं हम, पराग प्रकाशन, 1999
4. सूर्य देता है मन्त्र, आलेख प्रकाशन, 2005.
कहानी संग्रह: 1. पहचान, नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, 1985
2. फिर वहीं से शुरू, सामयिक प्रकाशन, 1998.
3. क्रमश: भारतीय ज्ञानपीठ,
4. वैलंटाईन डे, इन्द्रप्रस्थ प्रकाशन, 2002
5. पूर्णविराम, भारतीय ज्ञानपीठ, 2005.
6. घर बेघर (2007) पेंगुअन (याजा बुक्स)
उपन्यास: 1. अपार्थ, नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, 1986
2. आवर्तन, नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, 1992
3. हैमबर्गर, हिन्दी बुक सेंटर, 1996
4. यह खबर नहीं अखिल भारती प्रकाशन, 2002
5. मैं घूमर नाचुहूँ (2009)
6. पासवर्ड (2009)
आलोचना, शोध:
1. नयी कविता की परम्परा और भूमिका, अखिल भार्ती प्रकाशन, 1988
2. अग्येय की काव्य संवेदना, अखिल भारती प्रकाशन, 1997
3. शांतिप्रिय द्विवेदी व्यक्तित्व और क्रितित्व, साहित्य अकादमी, 1992
4. शमशेर का कवि क्रितित्व, दिल्ली विशविध्यालय प्रकाशन, 1995
5. कथा-अन्तर्कथा, प्रभात प्रकाशन
: कमला नेह्रू नारीमुक्ति की पुरधा, कांग्रेस, 1985.
शताब्दी समारोह की पुस्तक समिति के अन्तर्गत प्रकाशित, तत्कालीन राष्ट्रपति ग्यानी जैलसिंह द्वारा राष्ट्रपति भवन में इस पुस्तक का लोकापर्पण
: स्त्री संशब्द: विवेक और विभ्रम, अमित प्रकाशन, 2005.
: असंगठित क्षेत्र में इस्त्रियों के अधिकार, नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा 2001 प्रकाशित. इस पुस्तक की चह आव्रित्तियां हिन्दी में और एक संस्करण कन्नड़ में प्रकाशित.
अनुवाद: अपार्थ उपन्यास का अंग्रेज़ी में अनुवाद, शिप्रा, 1996.
मर्सीकिलिंग एण्ड अदर स्टोरीज - कहानी संग्रह अंग्रेज़ी में अनुदित. नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, 1996.
स्प्रिंग कम्ज इन कैलेण्डर्स, कविता संग्रह अंग्रेज़ी में अनूदित. नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, 2005
स्त्री-विमर्श: सचिव, भारतीय महिला परिषद (अॉल इंडिया वूमन कांफ्रेंस), दक्षिण दिल्ली शाखा.
: संचालक, स्त्री अध्ययन और विकास केन्द्र (वुमन स्तुडी एण्ड डवलपमेंट सेंटर), दिल्ली विश्वविद्यालय (जे. एम. सी.)
सम्पादक संचालक, पत्रिका और स्कॉलर्शिप, दिल्ली विश्वविद्यालय, महिला परिषद (यूनिवर्सिटी वुमन असोसिम्शन ऑफ़ दिल्ली)
: सदस्य, अन्तर्राष्ट्रिय विश्वविद्यालय महिला परिषद
: राष्ट्रिय स्त्री अध्ययन परिषद
: स्त्री शक्ति सम्बन्ध (वुमन पावर कन्टक्ट)
: स्त्रियों में जाग्रति लाने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया - व्याख्यान, गोष्ठियाँ, सभाएँ, नाटक, नुक्कड़ नाटक, फ़िल्म इत्यादि के माध्यम से.
: आर्थिक स्वावलम्बन के लिए - कम्प्यूटर ट्रेनिंग, सिलाई, ब्लॉक प्रिंटिंग, फूड प्रिजरवेशन, बेकरी, मोमबत्ती बनाना इत्यादि का प्रशिक्षण दिया गया
: एन. जी. ओ. और संस्थाओं से सम्बन्ध
: इंडोलिका टुरोनेशिया, (टुरैनो इटली), इंडियन लिटेरेचर, प्रतिभा इंडिया, इंडिया अबरोड, आई. आई. सी. क्वाटरली जैंटलमैन, क्रिएटिव फ़ोरम, पोएट्री सोसाइटी जनरल, इवीज, फ़ैमिना इत्यादि में अनूदित कहानियाँ, कविताएँ, आलेख अंग्रेज़ी में प्रकाशित.
प्रकाशक: भारतीय ग्यान्पीठ, साहित्य अकादमी, नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, सामयिक प्रकाशन, पराग प्रकाशन, आलेख प्रकाशन, अखिल भार्ती प्रकाशन, इन्द्रप्रस्थ प्रकाशन, प्रभात प्रकाशन इत्यादि.
अन्तर्राष्ट्रीय- राष्ट्रिय कान्फ्रेंस में पत्र प्रस्तुति: (इटली), बीजिंग (चीन), बेबीलोन (बगदाद), जार्जिया, अटलांटा (अमेरिका), मॉरिशस, इस्लामाबाद, लाहौर (पाकिस्तान), ट्रिनिडाड, लंदन, बरमिंघम, मैनचेस्तर (यू. के.)
रच्नाएं अंथालॉजी में: कई अंथालॉजी और हिन्दी साहित्य के इतिहास में शामिल की गई.
: अरलीन जैद - 'इन देयर ऑन वोएसिज़'
: जगदीश चतुर्वेदी - समकालीन कविता
: चित्रा मुद्गल - देह देहरी
: चनामिका -कहती हैं औरतें
: महेश दरपण - बीसवीं शताब्दी की कहानी
: साहित्य के इतिहास में उल्लेख - प्रकाश मनु द्वारा लिखित उपन्यास का इतिहास
: गोपल प्रसाद द्वारा लिखित उपन्यास का इतिहास, कहानी का इतिहास
: जगदीश चतुर्वेदी द्वारा आधुनिक साहित्य का इतिहास.
: कई 'हू ज़ हू' में नाम शामिल
रचनाओं पर शोधकार्य: कई विश्वविद्यालयों में कहानियों और उपन्यासों पर शोध कार्य अब तक अपार्थ, आवर्तन, क्रमश:, गवाह, साक्षी हैं हम, यह खबर नहीं, पर एम. फिल के लघु शोध प्रबन्ध लिखे जा चुके हैं.
: कहानियों और उपन्यासों पर चार पी. एच. डी संपन्न
: इस समय अजमेर (राजस्थान), बेंगलूर (कर्नाटक), हैदराबाद और पटियाला (पंजाब) से कहानियों और उपन्यासों पर पी-एच. डी.
कविताएं, कहानियां, उपन्यासों से उद्धरण शोधकार्य के लिए शोध सामग्री के रूप में उपयोग.
आकाशवाणी-दूर्दर्शन: "गैम्बरगर" उपन्यास पर रेडियो धारावाहिक
"हैमबर्गर" पर टेलीविजन धारावाहिक
: प्रसार भारती द्वारा 'जंगल' कहानी पर फ़िल्म
: प्रसार भारती द्वारा लेखक के रूप में - पर फ़िल्म.
फ़िल्म: अशोक बजरानी ने 'समयबोध' कहानी पर फ़िल्म 'उत्तेजना' बनाई. प्रीति खरे कीया पहली फ़िल्म थी. मीरा दीवान की फ़िल्म के लिए स्क्रिप्ट लेखन
: दूर्दर्शन पर पत्रिका साहित्यिक कार्यकर्म की बीस-बाईस साल तक कंपेयर आकाशवाणी और दूर्दर्शन के सामाजिक, सांस्क्रितिक और साहित्यिक कार्यक्रमों की चर्चाओं में भागीदारी.
दूर्दर्शन और आकाशवाणी के विशेष कार्यक्रमों के लिए साहित्यकारों और विशिष्त व्यक्तियों के साक्षात्कार:
निर्मला वर्मा का, दूर्दर्शन और आकाशवानी पर
अग्येय का दूर्दर्शन पर
भीष्म साहनी का दूर्दर्शन और आकाशवाणी पर
जैनेन्द्र कुमार का दूर्दर्शन्पर
महाश्वेता देवी का पत्रिका के लिए
इसके अलावा समकालीन लगभग सभी रचनाकारों - रामदरश मिश्र, रजेन्द्रा यादव, नामवर सिंह, कमलेश्वर, नित्यानंद तिवारी, महीप सिंह, कुसुम अंसल, चंद्रकान्ता, चित्रा मुद्गल, म्रिदुला गर्ग, राजी सेठ, नासिरा शर्मा, इन्दुजैन इत्यादि लेखिकाओं का दूरदर्शन पर, आकाशवाणी, पत्र-पत्रिकाओं के लिए साक्षात्कार और चर्चाओं के कम्पेयर.
सम्मान एवं पुरस्कार: साहित्यकार सम्मान, हिंदी अकादेमी दिली, साहित्य भूषण सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, साधना श्रेष्ठ सम्मान, मध्य प्रदेश, साहित्य श्रेष्थ सम्मान बिहार), प्रवासी भारतीय साहित्य और कला सभा जार्जिया अटलांटा (अमेरिका), द्वारा रचनाकर सम्मान, साहित्यकार सम्मान, बुद्धिजीवी और संस्क्रिति समिति (उत्तर प्रदेश)'अस्मिता' प्रवासी, भारतीयों की अमेरिका में संस्था द्वारा 'घर और औरत' श्रिंखला की कविताओं पर सम्मान. साहित्य भार्ति सम्मान - राष्ट्र भाषा प्रचार समिति.
सदस्यता: ऑल इंडिया असोसिएशन ऑफ़ वीमन स्टडीज, यूनिवर्सिटी वीमन असोसिएशन, पोएट्री सोसाइटी इंडिया, इंडिया इंटर्नेशनल सेंटर, ऑथर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया, भार्तिय लेखक संगठन, लेखिका संघ, इंडियन सोसाइटी ऑफ़ ऑथर्स, रिचा, (उपाध्यक्ष), अखिल भारतीय महिला संघ.
अभिरूचियाँ: तैलचित्र बनाना और बोंसाई उगाना.
यात्राएँ: लगभग सारा भारत हॉलैण्द, फ़्रांस, थाइलैंड, बैकेंग, सिंगापुर, मलेशिया और आस्ट्रेलिया
संपर्क: डी-38, प्रेस एन्क्लेव, साकेत, नई दिल्ली - 110017

Monday, August 13, 2012

हम सुनते कम और बोलते ज्यादा हैः के.जी. सुरेश








          एमसीयू में पत्रकारिता की वस्तुनिष्टता विषय पर व्याख्यान
भोपाल,13 अगस्त।  देश के जाने माने पत्रकार एवं स्तंभ लेखक के.जी.सुरेश का कहना है कि हम पढ़ते कम और लिखते ज्यादा हैं तथा सुनते कम व बोलते ज्यादा हैं। वे यहां माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारिता की वस्तुनिष्टता विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वस्तुनिष्ठता के मायने हैं कि अपेक्षित तटस्थता और सभी पक्षों को समान अवसर देना। किंतु कोई भी पत्रकारिता राष्ट्रहित से बड़ी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित मीडिया को प्रभावित करते हैं, अमरीकी मीडिया इसका उदाहरण है। इसलिए वस्तुनिष्ठता और तटस्थता के मायने अलग-अलग संदर्भों में भिन्न हो जाते है। क्योंकि अगर राष्ट्र नहीं बचेगा तो न प्रेस बचेगा न उसकी आजादी।
     उन्होंने कहा कि सबके अपने-अपने सच हैं और हम अपने तरीके से घटनाओं की व्याख्या करते हैं। इसमें स्थानीयता दृष्टिकोण सबसे अहम है। श्री सुरेश ने कहा कि विभिन्न समाजों उसकी संस्कृति व परंपराओं की समझ न होने के कारण हम गड़बड़ करते हैं। यह ठीक नहीं है। जैसे उत्तर-पूर्व के राज्यों के बारे में हमारी नासमझी के चलते कई तरह से संकट खड़े हो जाते हैं। उनका कहना था कि देश की विविधता का ख्याल रखे बिना, उसे सम्मान दिए बिना हम राष्ट्र को एकजुट नहीं रख सकते। संकट यह है कि हम अपने परिवेश, परिवार से मिले मूल्यों और अपने दृष्टिकोण से चीजों को विश्लेषित करते हैं जबकि दूसरा नजरिया भी हो सकता है, हम इसका विचार नहीं करते। यह नासमझी हमारे लेखन से लेकर दैनंदिन व्यवहार में भी दिखती है। उनका कहना था कि पत्रकारिता जनता का मत निर्माण का काम करती है, वह जनता की रूचि के हिसाब से नहीं चल सकती। उसे सच और तथ्य बताने हैं न कि जनता की पसंद- नापसंद के आधार पर उसे चलना है। हम राजनेता नहीं हैं कि जनता को खुश रखने के उपाय सोचें। उन्होंने कहा कि देश की जमीन से ही नहीं, लोगों से भी प्यार करना होगा तभी वास्तविक सवाल सामने आ सकेंगें।
     श्री सुरेश ने कहा कि यह विडंबना ही है कि तीन प्रतिशत लोग शेयर मार्केट में निवेश करते हैं किंतु शेयरों के भाव गिरते हैं तो वह हेडलाइंस बनती है किंतु किसानों की आत्महत्या के सवाल बड़ी जगह नहीं पाते। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे स्वयं की पृष्ठभूमि, जाति, धर्म को अपनी रिर्पोटिंग में न आने दें। न ही भावुकता में बहकर तथ्यों से छेड़छाड़ करें। राष्ट्रीयता का प्रखर बोध ही पत्रकारिता का मार्गदर्शक बन सकता है। कार्यक्रम का संचालन डा.संजीव गुप्ता ने किया तथा आभार प्रदर्शन डा. राखी तिवारी ने किया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी, जगमोहन राठौर, अजीत कुमार, हिमगिरी सिरोही, रेनू वर्मा, उमा सिंह यादव, शालिनी सिंह बघेल, बृजेंद्र शुक्ला सहित अनेक अध्यापक और जनसंचार विभाग के छात्र मौजूद रहे।

Saturday, August 11, 2012

समाज की बेहतर समझ से ही अच्छी पत्रकारिताः कुठियाला






  

भोपाल,11 अगस्त। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृजकिशोर कुठियाला का कहना है कि समाज और संस्कृति की बेहतर समझ से ही अच्छी पत्रकारिता हो सकती है। वे यहां विवि परिसर में जनसंचार विभाग के साप्ताहिक आयोजन सार्थक शनिवार में संचार, संस्कृति और मानव समाज विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
   प्रो. कुठियाला ने कहा कि राष्ट्र सिर्फ भूखंड नहीं है, एक सांस्कृतिक अवधारणा है। जब हम अपने राष्ट्र से प्रेम करते हैं तो इसकी महान परंपरा को भी आत्मसात करते हैं। उन्होंने कहा कि संचार ही संस्कृति का वाहक है। अकेला मनुष्य अपने आप में कुछ नहीं है उसकी दूसरों पर निर्भरता है। यह एक सामाजिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक सच है। उन्होंने कहा कि संचार और संवाद से ही स्थितियां और समाज बनते व बिगड़ते हैं। यह एक मौलिक जरूरत है। उनका कहना था कि मनुष्य के लिए सृजन, भोजन और समाज जरूरी हैं। इसके बावजूद संचार और संवाद मनुष्य की अनिर्वायता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में अच्छे संचारकर्मी ही हमें मौजूदा चुनौतियों से जूझना सिखा सकते हैं और समाज में व्याप्त तनावों को कम कर सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डा. राखी तिवारी ने किया। आरंभ में डा. संजीव गुप्ता ने पुष्पगुच्छ देकर कुलपति का स्वागत किया।
   इसके पश्चात विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए और हिंदी सिनेमा के 100 साल पर एक क्विज में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी, जगमोहन राठौर, अजीत कुमार, हिमगिरी सिरोही, रेनू वर्मा, साइमा इम्तियाज सहित अनेक लोग मौजूद रहे।