Friday, May 20, 2011

अमंगल की खबरों से घिरे हैं हमः शुक्ल


नारद जयंती की पूर्व संध्या पर पत्रकारिता विवि में व्याख्यान
भोपाल,18 मई,2011। प्रख्यात कवि-कथाकार ध्रुव शुक्ल का कहना है हम अमंगल की खबरों से घिरे हुए हैं। यूं लगता है कि शुभ समाचार आने बंद हो गए हैं। ऐसे में हमारे समय की वाणी प्रदूषित हो गयी। हैं। वे यहां माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल देवर्षि नारद जयंती की पूर्वसंध्या पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्यवक्ता की आसंदी से बोल रहे थे। व्याख्यान का विषय था ‘लोकमंगल संचारकर्ता नारद’। उन्होंने कहा कि शब्द ब्रम्ह हैं इसलिए हमें लोकमंगल की पत्रकारिता का विकास करना होगा। अगर हम लगातार अध्यात्मशून्य समाज बनाते जाएंगें तो हम कभी सफल नहीं हो सकते।
श्री शुक्ल ने कहा कि देवर्षि नारद ने हमेशा लोकमंगल के लिए अनवरत यात्राएं कीं। वे एक ऐसे यात्री हैं जो ईश्वर के मन को भाँप लेते हैं और ईश्वर पर अपना अधिकार समझते हैं। उन्होंने नारद को संदेशवाहक, संवादकर्ता ओर संचारकर्ता की भूमिका में देखने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि नारद दो बातों पर ज्यादा जोर देते थे कि पहला यथार्थ को निष्पक्ष दृष्टि से देखा जाए, और एक अच्छा श्रोता बना जाए। यही गुण एक पत्रकार का भी होना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अक्षरा के प्रधान संपादक कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि जिस तरह नारद किसी भी बात या खबर को सिर्फ बताते नहीं थे बल्कि उसके आगे भी जाते थे, ठीक यही शैली पत्रकार की भी होनी चाहिए, उसे खबर से आगे जाकर खबरों को देखना चाहिए। नारद की पत्रकार के तौर पर तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह पत्रकार लोगों की समस्याओं को अपने समाचार पत्र के माध्यम से समाज और सरकार के सामने रखता है, उसी तरह नारद भी लोगों की समस्याओं को समझकर उन्हें विध्नहर्ता देवताओं के सामने रखते थे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने कहा कि नारद के भक्ति सूत्रों को सही दृष्टिकोण से समझा जाए तो पायेंगे कि मीडिया से संबंधित सारे सिद्धांत ये अपने अंदर समेटे हुए हैं। नारद के भक्ति सूत्रों पर गहन शोध की जरूरत है। बात की तर्कसंगत व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि नारद का मानना है कि सत्य कभी पूर्ण नहीं हो सकता है और विवाद से आप किसी के मत को नहीं बदल सकते हैं यह दोनों बात आज भी व्यवहारिक हैं और नारद सूत्रों की प्रांसगिकता वक्त के साथ ज्यादा मजबूत होती जा रही है। इस अवसर दैनिक ट्रिब्यून, चंडीगढ़ के पूर्व संपादक विजय सहगल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार स्व. अंबिकाप्रसाद वाजपेयी की पुस्तक ‘ मेरे साहित्यिक संस्मरण’ का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम में श्रेष्ठ विचारों के लिए पांच छात्र-छात्राओं के 501 रूपए के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जिनमें योगिता ठाकुर, योगेश कुमार साहू, ओमप्रकाश पवार, कपिलदेव सिंह, मयंक शर्मा के नाम शामिल हैं। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता श्रीकांत जोशी, वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, जीके छिब्बर, डा. श्रीकांत सिंह, प्रो. आशीष जोशी, नरेंद्र जैन, अनिल सौमित्र, पुष्पेंद्रपाल सिंह, डा. पवित्र श्रीवास्तव, डा. आरती सारंग, राखी तिवारी, डा. मोनिका वर्मा, मीता उज्जैन, सुरेंद्र पाल, दीपेंद्र सिंह बधेल, बबिता अग्रवाल, पी. शशिकला, डा. अविनाश वाजपेयी, लालबहादुर ओझा मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी और आभार प्रदर्शन राघवेंद्र सिंह ने किया।
रिपोर्टः शिशिर सिंह

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